अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर एक दिवसीय सेमिनार का प्लांटिका संस्थान, श्रीमती मंजीरा देवी विश्वविद्यालय एवं उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सयुंक्त तत्वाधान में हुआ सफलआयोजन- देहरादून, 22 मई, 2026

देहरादून | दिनांक: 22 मई, 2026

अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के अवसर पर PLANTICA – इंडियन एकेडमी ऑफ रूरल डेवलपमेंट, देहरादून तथा श्रीमती मंजीरा देवी विश्वविद्यालय, उत्तरकाशी द्वारा उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UKPCB), उत्तराखंड सरकार, देहरादून के सहयोग से एक दिवसीय सेमिनार का सफल आयोजन हाइब्रिड मोड (ऑनलाइन एवं ऑफलाइन) में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य जैव विविधता संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन एवं सतत विकास के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना तथा युवा पीढ़ी को प्रकृति संरक्षण के लिए प्रेरित करना था।

इस कार्यक्रम में देशभर से शिक्षकों, वैज्ञानिकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं पर्यावरण प्रेमियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम में जैव विविधता के संरक्षण, पर्यावरणीय चुनौतियों तथा मानव जीवन पर इसके प्रभावों पर गहन चर्चा की गई।

कार्यक्रम के मुख्य आमंत्रित वक्ता डॉ. आर. पी. काला, पूर्व कार्यक्रम समन्वयक, उत्तराखंड जैव विविधता बोर्ड, देहरादून रहे। अपने व्याख्यान में उन्होंने जैव विविधता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जैव विविधता केवल जीव-जंतुओं और पौधों की विविधता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पृथ्वी पर जीवन के संपूर्ण संतुलन का आधार है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में अनियोजित विकास, बढ़ते प्रदूषण, वनों की कटाई और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याओं के कारण जैव विविधता गंभीर संकट का सामना कर रही है।

डॉ. काला ने कहा कि उत्तराखंड जैव विविधता की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध राज्य है और यहां हिमालयी क्षेत्रों में अनेक दुर्लभ एवं औषधीय प्रजातियां पाई जाती हैं। उन्होंने युवाओं एवं विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे जैव विविधता संरक्षण के लिए स्थानीय स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाएं तथा जैव संसाधनों के संरक्षण एवं उनके सतत उपयोग के प्रति जागरूकता फैलाएं। उन्होंने पारंपरिक ज्ञान, स्थानीय समुदायों की भूमिका तथा जैव विविधता प्रबंधन समितियों की आवश्यकता पर भी विशेष बल दिया।

कार्यक्रम के संरक्षक प्रो. (डॉ.) अनूप बडोनी ने अपने संदेश में कहा कि जैव विविधता का संरक्षण वर्तमान समय की एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रकृति एवं मानव जीवन एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं और यदि जैव विविधता का संतुलन बिगड़ता है तो इसका प्रतिकूल प्रभाव मानव समाज पर भी पड़ता है। उन्होंने युवाओं को पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में शोध एवं नवाचार की दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम की आयोजन सचिव एवं PLANTICA की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. पल्लवी चौहान ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि जैव विविधता संरक्षण केवल वैज्ञानिकों या सरकारों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने बताया कि इस प्रकार के कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

कार्यक्रम की सह-आयोजन सचिव एवं PLANTICA की वैज्ञानिक अधिकारी वंदना पेटवाल ने कार्यक्रम के संचालन एवं समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने प्रतिभागियों को अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के महत्व की जानकारी देते हुए पर्यावरण संरक्षण के प्रति सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने जैव विविधता संरक्षण से संबंधित विभिन्न विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए तथा पर्यावरण संरक्षण हेतु सामूहिक संकल्प भी लिया। कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं एवं प्रतिभागियों ने यह संदेश दिया कि जैव विविधता का संरक्षण केवल आज की आवश्यकता नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की जिम्मेदारी भी है।

कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें सभी प्रतिभागियों, सहयोगी संस्थाओं एवं आयोजन समिति के सदस्यों के योगदान की सराहना की गई। यह आयोजन ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाला साबित हुआ।

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