विश्व पर्यावरण दिवस पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन , उत्तरकाशी, 05 जून 2026

विश्व पर्यावरण दिवस पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन, पर्यावरण संरक्षण हेतु सामूहिक प्रयासों पर दिया गया बल

उत्तरकाशी, 05 जून 2026।

विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के अवसर पर PLANTICA – इंडियन एकेडमी ऑफ रूरल डेवलपमेंट, देहरादून / प्लांटिका पर्वतीय केंद्र, उत्तरकाशी एवं श्रीमती मंजीरा देवी विश्वविद्यालय, उत्तरकाशी द्वारा उत्तराखण्ड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UKPCB), उत्तराखण्ड सरकार, देहरादून के तत्वावधान में एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी (National Symposium on World Environment Day 2026) का भव्य आयोजन हाइब्रिड मोड (ऑनलाइन एवं ऑफलाइन) में किया गया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से 120 से अधिक प्रतिभागियों, शोधार्थियों, शिक्षकों, वैज्ञानिकों, विद्यार्थियों एवं पर्यावरण प्रेमियों ने सहभागिता की।

कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री अमित पोखरियाल, नोडल अधिकारी – EIACP Hub, UKPCB, देहरादून द्वारा की गई। मुख्य अतिथि के रूप में श्रीमती साक्षी रावत, प्रभागीय वनाधिकारी (DFO), टिहरी डैम-II, उत्तरकाशी उपस्थित रहीं। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि प्रो. (डॉ.) भगवान नौटियाल, माननीय कुलपति, श्रीमती मंजीरा देवी विश्वविद्यालय, उत्तरकाशी थे। कार्यक्रम के सह-अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) अनूप बड़ोनी, अधिष्ठाता, कृषि संकाय एवं वरिष्ठ शिक्षाविद् रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। स्वागत उद्बोधन में आयोजकों ने विश्व पर्यावरण दिवस की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए सतत विकास, जैव विविधता संरक्षण एवं जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों पर सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में श्री अमित पोखरियाल ने पर्यावरणीय जागरूकता, जनभागीदारी एवं पर्यावरण शिक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी दायित्व नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने उत्तराखण्ड राज्य में पर्यावरण संरक्षण हेतु संचालित विभिन्न कार्यक्रमों एवं EIACP Hub की गतिविधियों की जानकारी भी साझा की तथा एकल यूज़ प्लास्टिक का प्रयोग न करने पर जोर दिया।

मुख्य अतिथि श्रीमती साक्षी रावत ने अपने संबोधन में वनों की भूमिका, जैव विविधता संरक्षण तथा प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में वृक्षारोपण, जल संरक्षण एवं स्थानीय समुदायों की सहभागिता से ही पर्यावरणीय चुनौतियों का प्रभावी समाधान संभव है।

विशिष्ट अतिथि प्रो. (डॉ.) भगवान नौटियाल ने विश्वविद्यालयों एवं उच्च शिक्षा संस्थानों की भूमिका पर चर्चा करते हुए कहा कि युवाओं में पर्यावरणीय चेतना विकसित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने शोध, नवाचार एवं सामुदायिक सहभागिता आधारित गतिविधियों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया।

सह-अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) अनूप बड़ोनी ने अपने वक्तव्य में पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक कृषि, जल एवं मृदा संरक्षण तथा ग्रामीण विकास के संदर्भ में सतत् प्रबंधन की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण और स्थानीय ज्ञान का समन्वय आवश्यक है।

तकनीकी सत्र में आमंत्रित वक्ताओं ने विभिन्न विषयों पर व्याख्यान प्रस्तुत किए। डॉ. पूजा कैंतुरा, गन्ना विकास विभाग, उत्तराखण्ड सरकार ने कृषि एवं पर्यावरण के पारस्परिक संबंधों तथा सतत कृषि पद्धतियों पर अपने विचार साझा किए। श्री पाण्डेय, शोधकर्ता, व्रोक्लॉ विश्वविद्यालय, पोलैंड ने वैश्विक पर्यावरणीय चुनौतियों एवं अंतरराष्ट्रीय शोध परिप्रेक्ष्य प्रस्तुत किया। वहीं डॉ. मनीषा, चंडीगढ़ विश्वविद्यालय, पंजाब ने पर्यावरण शिक्षा, जन-जागरूकता एवं युवाओं की भूमिका पर प्रभावशाली व्याख्यान दिया।

संगोष्ठी के दौरान पोस्टर प्रस्तुतीकरण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें देशभर के विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता, स्वच्छ ऊर्जा एवं सतत विकास जैसे विषयों पर अपने शोध एवं नवाचार प्रस्तुत किए। प्रतिभागियों द्वारा प्रस्तुत पोस्टरों की विशेषज्ञों ने सराहना की।

विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में विश्वविद्यालय परिसर में वृहद वृक्षारोपण अभियान भी संचालित किया गया, जिसमें अतिथियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं स्वयंसेवकों ने विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण किया। इसके अतिरिक्त आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर ग्रामीणों एवं युवाओं को स्वच्छ पर्यावरण, प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली, जल संरक्षण एवं हरित विकास के प्रति जागरूक किया गया।

कार्यक्रम की आयोजन सचिव डॉ. पल्लवी चौहान, वरिष्ठ वैज्ञानिक, PLANTICA ने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम पर्यावरण संरक्षण के प्रति समाज में सकारात्मक चेतना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कार्यक्रम के सह-आयोजन सचिव वंदना पेटवाल, वैज्ञानिक अधिकारी, PLANTICA ने संगोष्ठी की गतिविधियों एवं उपलब्धियों का विवरण प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के सफल संचालन में श्री सूरज जोशी, समन्वयक, PLANTICA हिल सेंटर, उत्तरकाशी तथा सुश्री अंजलि शर्मा, समन्वयक, PLANTICA, देहरादून का विशेष योगदान रहा।

राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास के प्रति सामूहिक संकल्प के साथ हुआ। सभी प्रतिभागियों ने प्रकृति संरक्षण, हरित जीवनशैली अपनाने तथा भावी पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित करने का संकल्प लिया।

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