प्लांटिका द्वारा “रिमोट सेंसिंग एवं कृषि में इसका महत्व” विषय पर कार्यशाला का आयोजन, देहरादून, 07 अगस्त 2026

देहरादून, 07 अगस्त 2026।
कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के प्रभावी उपयोग, फसल निगरानी, प्राकृतिक संसाधनों के आकलन तथा वैज्ञानिक कृषि प्रबंधन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से PLANTICA, देहरादून द्वारा शुक्रवार, 07 अगस्त 2026 को “Remote Sensing and its Importance in Agriculture” (रिमोट सेंसिंग एवं कृषि में इसका महत्व) विषय पर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों एवं कृषि क्षेत्र से जुड़े प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यशाला के मुख्य वक्ता Prof. (Dr.) Ganesh Dutt Bhatt, TMU, Moradabad (ICAR Accredited) ने रिमोट सेंसिंग की मूल अवधारणा, कृषि क्षेत्र में इसके उपयोग तथा भविष्य की संभावनाओं पर विस्तृत एवं व्यावहारिक जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में कृषि को अधिक सटीक, वैज्ञानिक, संसाधन-कुशल और जलवायु-स्मार्ट बनाने में रिमोट सेंसिंग महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उपग्रह आधारित तकनीकों एवं विभिन्न प्रकार के सेंसरों की सहायता से बड़े कृषि क्षेत्रों की निगरानी कम समय में की जा सकती है तथा फसलों की स्थिति, भूमि उपयोग, मृदा एवं जल संसाधनों और पर्यावरणीय परिस्थितियों का प्रभावी आकलन संभव है।

प्रो. भट्ट ने अपने व्याख्यान में Satellite Imagery, GIS, Crop Monitoring, Vegetation Indices, NDVI, Soil and Water Resource Assessment, Crop Health Monitoring तथा Precision Agriculture जैसे विषयों को सरल एवं व्यावहारिक तरीके से समझाया। उन्होंने बताया कि रिमोट सेंसिंग तकनीक के माध्यम से फसल की वृद्धि एवं स्वास्थ्य की निगरानी, सूखे एवं जलभराव की पहचान, फसल क्षेत्र का आकलन, कीट एवं रोग प्रभावित क्षेत्रों की पहचान तथा कृषि उत्पादन से संबंधित बेहतर निर्णय लेने में सहायता मिलती है।

कार्यशाला के Patron Prof. (Dr.) Anoop Badoni ने कहा कि कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान को आधुनिक तकनीकों से जोड़ना वर्तमान समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि रिमोट सेंसिंग केवल उपग्रह चित्रों के अध्ययन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कृषि नियोजन, फसल प्रबंधन, प्राकृतिक संसाधन संरक्षण, जल प्रबंधन, आपदा प्रबंधन और कृषि अनुसंधान के लिए एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपकरण बन चुका है। उन्होंने PLANTICA द्वारा विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को नवीनतम कृषि तकनीकों से जोड़ने के लिए आयोजित की जा रही ऐसी कार्यशालाओं को उपयोगी एवं भविष्य उन्मुख पहल बताया।

कार्यशाला की Program Coordinator Vandana Petwal, Assistant Scientist एवं Centre Head, PLANTICA ने कार्यक्रम के उद्देश्य एवं महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम विद्यार्थियों को कक्षा-कक्ष की पारंपरिक शिक्षा से आगे बढ़कर आधुनिक कृषि तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करते हैं। उन्होंने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे रिमोट सेंसिंग एवं डिजिटल कृषि तकनीकों का उपयोग अपने अध्ययन, शोध एवं भविष्य के व्यावसायिक कार्यों में करें।

कार्यशाला के Co-Coordinators Anjali Sharma, Technical Associate, PLANTICA तथा Mr. Suraj Joshi, Technical Associate, PLANTICA ने कार्यक्रम के तकनीकी एवं समन्वय संबंधी कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दोनों ने प्रतिभागियों के साथ संवाद करते हुए कार्यशाला की गतिविधियों को व्यवस्थित रूप से संचालित किया तथा विषय से संबंधित विभिन्न तकनीकी पहलुओं पर चर्चा में सहयोग प्रदान किया।

इस अवसर पर Dr. Pallavi Chauhan, Senior Scientist, PLANTICA एवं Dr. Arvind Nainwal, Senior Scientist, PLANTICA भी उपस्थित रहे। दोनों वैज्ञानिकों ने विशेषज्ञ वक्ता के साथ कृषि में रिमोट सेंसिंग की उपयोगिता, शोध की संभावनाओं तथा विद्यार्थियों के लिए उभरते अवसरों पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने कहा कि कृषि में रिमोट सेंसिंग, GIS, ड्रोन टेक्नोलॉजी एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकों का एकीकृत उपयोग आने वाले समय में कृषि अनुसंधान एवं उत्पादन प्रणाली में महत्वपूर्ण परिवर्तन ला सकता है।

कार्यशाला में Noida International University, GB Pant University of Agriculture and Technology (GBPUAT), Pantnagar, Amity University, Haridwar University, SGRR University, HIT College, UCST College सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के विद्यार्थियों तथा प्रतिभागियों ने सहभागिता की। इसके अतिरिक्त विभिन्न अन्य शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े प्रतिभागियों ने भी कार्यशाला में भाग लेकर विषय विशेषज्ञ से जानकारी प्राप्त की।

कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों ने रिमोट सेंसिंग के कृषि क्षेत्र में व्यावहारिक उपयोग से संबंधित विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञ द्वारा विस्तारपूर्वक समाधान किया गया। संवादात्मक सत्र में विद्यार्थियों ने Precision Agriculture, Crop Health Assessment, Satellite Data Analysis, GIS Applications, Agricultural Mapping तथा Climate-Smart Agriculture जैसे विषयों में विशेष रुचि दिखाई।

PLANTICA, Dehradun द्वारा आयोजित यह कार्यशाला कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान में आधुनिक तकनीकी दृष्टिकोण को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आई।

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